केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले इस सर्वे (2023-24) के लिए पूरे देश में 7.1 लाख से अधिक महिलाओं और 1 लाख से अधिक पुरुषों को शामिल किया गया था, जिससे इसके आंकड़े बेहद विश्वसनीय माने जा रहे हैं।
1. वयस्कों में बढ़ता मोटापा (Obesity)
सर्वे के मुताबिक, देश में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (Lifestyle Diseases) का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। पिछले सर्वे (NFHS-5, 2019-21) के मुकाबले इस बार पुरुषों और महिलाओं दोनों में वजन बढ़ने की समस्या गंभीर हुई है:
2. हाई ब्लड शुगर (High Blood Sugar) के डराने वाले आंकड़े
15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों में डायबिटीज या हाई ब्लड शुगर का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ा है:
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महिलाओं में बढ़ोतरी: हाई ब्लड शुगर वाली या इसके लिए दवा ले रही महिलाओं का अनुपात 13.5% (NFHS-5) से बढ़कर अब 17.8% (NFHS-6) हो गया है।
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पुरुषों की स्थिति: पुरुषों में हाई ब्लड शुगर की यह दर और भी अधिक यानी 20.9% तक पहुंच गई है।
मुख्य आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण (NFHS-5 बनाम NFHS-6)
| स्वास्थ्य मानक (Health Indicators) |
NFHS-5 (2019-21) |
NFHS-6 (2023-24) |
ट्रेंड (Trend) |
| मोटापा (महिलाएं - 15-49 वर्ष) |
24.0% |
30.7% |
📈 तेजी से बढ़ा |
| मोटापा (पुरुष - 15-49 वर्ष) |
22.9% |
27.3% |
📈 बढ़ोतरी |
| हाई ब्लड शुगर (महिलाएं - 15+ वर्ष) |
13.5% |
17.8% |
📈 चिंताजनक वृद्धि |
| शहरी महिलाओं में मोटापा |
- |
42.8% |
⚠️ सबसे अधिक प्रभावि |
3. बच्चों की सेहत में सुधार: डायरिया के मामलों में कमी
वयस्कों के विपरीत, देश के नौनिहालों की सेहत से एक अच्छी खबर आई है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों में डायरिया (Diarrhea/दस्त) के मामलों में थोड़ी कमी दर्ज की गई है। इस सुधार के पीछे दो मुख्य कूटनीतिक और जमीनी कारण रहे हैं:
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वैक्सीनेशन कवरेज (Vaccination): देश में बच्चों के टीकाकरण अभियान में काफी सुधार हुआ है।
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सुरक्षित पेयजल (Safe Drinking Water): ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में साफ और सुरक्षित पानी की पहुंच बढ़ने से पानी से होने वाली बीमारियों में कमी आई है